शमशान को मुक्तिस्थल भी कहा जाता है क्योंकि यहीं पर मृत्यु के पश्चात् आत्मा को शरीर से मुक्ति मिलती है। शमशान एक ऐसी जगह है जहां पर तंत्र-साधना ज्यादा होती है। ये तो हम सभी जानते हैं कि शमशान में शुभ कार्य करना बिलकुल वर्जित है लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि शमशान की काली रात में तंत्र-साधना के अतिरिक्त अनुष्ठान भी संपन्न किए जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही अनुष्ठानों के बारे में जो केवल शमशान में ही संपन्न होते हैं।
कर्ण पिशाचिनी
पारलौकिक शक्तियों को वश में करने की यह विद्या विशेषज्ञों और सिद्ध गुरुओं के मार्गदर्शन में ही संपन्न होती है। इस साधना के पश्चात् इंसान में दूसरों की व्यक्तिगत जानकारी भी हासिल करने की शक्ति आ जाती है। इस साधना की सिद्धि के पश्चात् कोई भी प्रश्न का उत्तर पिशाचिनी कान में आकर देती है।
मारण प्रयोग
शत्रु के नाश के लिए ये अनुष्ठान किया जाता है। शत्रु स्तंभन, शत्रु मारण और शत्रु विजयी का ये प्रयोग शत्रु के जीवन को कष्टों से भर देता है।
प्रेत सिद्धि
11 दिन तक चलने वाली इस साधना में प्रेत को बुलाया जाता है। प्रेत के प्रत्यक्ष होने पर साधक उससे कोई वचन मांग सकता है। इस सिद्धि के माध्यम से देवी-देवता के दर्शन भी प्राप्त हो सकते हैं।
काल भैरव साधना
इस साधना से भयंकर से भयंकर रोग से मुक्ति मिलती है। यदि आपके घर में कोई व्यक्ति असाध्य रोग से पीडित है तो आप उसके स्वास्थ्य के लिए इस साधना को कर सकते हैं। काल भैरव साधना से आंतरिक तकलीफ, मानसिक रोग, चिंता का कारण और मन की हीन भावनाएं नष्ट होती हैं।
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