संतान सुख
सुखी विवाहित जीवन के लिए संतान का होना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जिन लोगों की संतान नहीं होती वह अनेक उपाय एवं इलाज करते हैं। आजकल तो वैज्ञानिक तकनीक ने भी काफी विकास कर लिया है जो संतान प्राप्ति में सहायता करती है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किन ग्रहों की दशा के कारण जातक को निसंतान रहना पड़ता है अथवा उसे संतान प्राप्ति में मुश्किले आती हैं। जातक की जन्मकुंडली के आधार पर संतान सुख में देरी का कारण एवं निवारण का पता लगाया जा सकता है।
कुंडली में दोष
वैदिक ज्योतिष के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए जन्मकुंडली में 12 भावों में पांचवा भाव जिम्मेदार होता है। यदि कुंडली में पांचवा भाव मजबूत है अथवा यहां पर सकारात्मक भाव बैठे हैं तो जातक के अच्छी संतान मिलने के योग प्रबल हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर यदि पांचवे घर में शत्रु ग्रह बैठे हों अथवा बुरे ग्रहों से दृष्ट हो तो संतान प्राप्ति में समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पांचवें भाव में सूर्य और मंगल की उपस्थिति भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। किसी प्रकार का ग्रहण योग और खराब शुक्र भी संतान सुख में बाधा बनते हैं।
संतान प्राप्ति के प्रबल योग
पंचम भाव के स्वामी की महादशा-अंर्तदशा के समय संतान प्राप्ति के प्रबल योग बनते हैं। इसके अलावा जो ग्रह पंचम भाव को देख रहे हैं उनमें सबसे शक्तिशाली ग्रह की दशा में भी संतान योग बन जाते हैं।
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उपाय
यदि आपको संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो तो नियमित शिव पार्वती का बाल गणेश के साथ पूजन करें। इस उपाय के प्रभाव में आपको अवश्य ही संतान की प्राप्ति होगी।
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