शिवरात्रि पर ऐसे रखें व्रत और करें जाने शिवरात्रि की पूजन विधि, होगी हर मनोकामना पूरी

देवों के देव महादेव का महाशिवरात्रि व्रत भक्‍तों के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का त्‍योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 13 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर भोलेनाथ का अनूठा शृंगार किया जाएगा। बिजली की रंग-बिरंगी रोशनी से शिवालय जगमगाएंगे। इस पावन अवसर पर मंदिरों में शिवभक्‍तों की भारी भीड़ शिवलिंग के दर्शन को उमड़ती है।

कहा जाता है कि इस दिन शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। हज़ारों भक्त इस दिन कांवड़ में गंगा जल लाकर भगवान शिव को स्नान कराते हैं। शिवरात्रि को मंदिरों में चारों पहर विशेष पूजा की जाती है।

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कालरात्रि को पूरी रात मंदिर में शिवभक्‍त भजन-कीर्तन करते हैं। कई मंदिरों में शिव-पार्वती के विवाह का भी आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व ही शिवनगरी में विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले सा नजारा देखने को मिलता है। काशी नगरी के इस पवित्र स्‍थान में देश-विदेश से श्रद्धालु भोले बाबा की कृपा पाने के लिए आते हैं।

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पंडित व पुरोहित शिवमंदिर में एकत्रित हो बड़े-बड़े अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। कुंवारी कन्‍याएं महाशिवरात्रि का व्रत कर के भगवान शिव से अच्‍छे वर की कामना करती हैं। पुराणों में उल्‍लेख है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए इसी दिन तपस्‍या की थी। जिसके फलस्‍वरूप जो भी कुंवारी कन्‍या महाशिवरात्रि का व्रत रखती है उसे शिवशक्ति के आशीर्वाद से उत्‍तम वर की प्राप्ति होती है। 

शिव की महिमा 

कहते हैं भोलेनाथ बड़े भाले हैं, वे अपने भक्‍तों की भक्ति से बड़ी जल्‍दी प्रसन्‍न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि के विषय में मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है। उनकी कृपादृष्टि जिस पर पड़ जाए उसके जीवन का उद्धार हो जाता है।

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भक्‍तों का विश्‍वास है कि शिवरात्रि के अवसर पर शिवजी का सच्‍चे मन से व्रत एवं पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि महाशिवरात्रि की रात में देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था इसलिए यह शिवरात्रि वर्ष भर की शिवरात्रि से उत्तम है।  इस दिन शिव जी की उपासना और पूजा करने से शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं।

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पूजन विधि

शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर “ऊं नमो नम: शिवाय” मंत्र से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा कर अगले दिन प्रात: काल ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए।

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शिव के फलदायी मंत्र

शिव को पंचामृत से अभिषेक कराते हुए  ‘ऊं ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ऊं’ मंत्र का जाप करें।

  • स्त्रियां सुख-सौभाग्‍य के फल हेतु ‘ऊं ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ऊं’ मंत्र का उच्‍चारण करें।
  • अखंड लक्ष्मी प्राप्ति हेतु ‘ऊं श्रीं ऐं ऊं’ मंत्र की दस माला का जाप करें।
  • विवाह में आ रही रूकावटों को दूर करने के लिए शिवशक्‍ति के मंत्र ‘हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम’ का जाप करें।
  • संपूर्ण पारिवारिक सुख-सौभाग्य हेतु ‘ऊं साम्ब सदा शिवाय नमः’ मंत्र का उच्‍चारण करें।

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