महापराक्रमी परशुराम को जब करना पडा अपनी ही माता का वध….

 

शास्त्रों में परशुराम भगवान को भगवान विष्णु का छठां अवतार कहा जाता है। ये जमदग्नि ऋषि के पुत्र थे इनकी माता का नाम रेणुका था। भगवान परशुराम ने 21 बार पृथ्वी से अन्याय करने वाले क्षत्रियों का नाश किया था। सहस्त्रबाहु का अहंकार चूर्ण करने वाले परशुराम शास्त्र विधा में भी पारंगत थे। इनकी माता के द्वारा इन्हे छोटी उम्र में ही कई शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त हुआ था। भगवान परशुराम मातृ-पितृ भक्त थे। परशुराम के चार बडे भाई थे लेकिन सभी भाइयों में माता-पिता के सबसे प्रिय ये ही थे। उसके बावजूद इन्हे अपनी माता का शीश काटना पडा।

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इस विषय में एक कथा प्रसिद्ध है एक बार जमदग्नि ऋषि ने पूजन हेतु अपनी पत्नि को जल लेने भेजा। रेणुका पूजन हेतु जल लेने गंगा तट गई तो वहां गंधर्वराज चित्ररथ को अप्सराओं के साथ विहार करते हुये देखा। इस दृष्य से प्रभावित होकर वे कुछ समय तक उन्हे ही देखती रह गई। उसके बाद जब वे जल लेकर आश्रम पहुंची तब तक पूजन समय समाप्त हो चुका था, जिसके कारण जमदग्नि ऋषि अत्यधिक क्रोधित हुये उन्होने पत्नि के आर्य मर्यादा विरोधी आचरण एवं मानसिक व्यभिचार करने के दण्डस्वरूप पुत्रों को आदेश दिया की वे अपनी माता का तत्काल वध करें, परशुराम के चारों भाइयों ने पिता का आदेश मानने से इंकार कर दिया, अत्यधिक क्रोधित ऋषि ने उन्हे श्राप दिया की वे अपनी विचार शक्ति से शूण्य हो जायें। इसके बाद जब ऋषि ने परशुराम को माता का वध करने का आदेश दिया तो उन्होने पिता के आदेश का पालन करते हुये अपनी माता का शीश काट दिया। यह देख ऋषि अत्यधिक प्रसन्न हुये उन्होने पुत्र को 3 वरदान मांगने को कहा अत्यधिक विद्वान परशुराम ने तब पिता से 3 वर मांगे-

नेत्र दोषों के लिये रामबाण  है, ऋग्वेद का  यह  उपाय……

1- माता पुन: जीवित हो जाये।

2- आपकों माता के दोषों का तथा माता को इन सभी घटनाओं का स्मरण न रहे।

3- सभी भाई चेतना युक्त हो जाये।

Janam Kundali

 

पिता ने पुत्र की बुद्धिमता से प्रसन्न होकर तीनों वरदान दे दिये। स्थिति समान्य हो गई परन्तु माता की हत्या का कलंक व पाप हमेशा के लिये उन पर चढ गया। बाद में निवृति हेतु परशुराम ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करी जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने परशुराम को पाप मुक्त किया। तथा शिव ने प्रसन्न होकर  धनुष, अक्षय तुणीर एवं दिव्य फरसा प्रदान  किया।

ज्योतिष के अनेक दोषों को दूर करता है…. चंद्र रत्न ‘मोती’

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