क्या अखिलेश यादव दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ पायेंगे ?

मीडिया से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उत्‍तर प्रदेश के वर्तमान मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव का जन्‍म 1 जुलाई 1973 में सैफई में हुआ था। इसके आधार पर जो कुंडली तैयार हुई वह कुछ इस प्रकार है:

क्‍योंकि कहीं और अखिलेश के जन्‍म के संबंध में कोई दूसरी जानकारी उपलब्‍ध नही है इसलिए मैं इसी के आधार पर अखिलेश यादव की कुंडली का विश्‍लेषण कर रहा हूं। इस कुंडली के अनुसार जातक बुध की दशा से गुजर रहा है जो कि 13-11-2017 तक चलेगी जिस दौरान यह चंद्र के अंतर में रहेगी।

चुनावों को जीतने के लिए कुंडली में 10वें और 6ठें भाव का मजबूत होना बहुत जरूरी है और साथ में 9वां और 11वें भाव का साथ भी होना चाहिए। इस‍के अलावा इस कुंडली को देखकर साफ लगता है कि जातक का अपने पिता के साथ मनमुटाव होगा लेकिन ऐसा भी प्रतीत होता है कि जल्‍द ही दोनों एक दूसरे के सामने होंगे चाहे सिर्फ कैमरे को दिखाने के लिए हों।

मंगल, बुध और शुक्र तीनों शनि के नक्षत्र में हैं। शनि गुरू का उपनक्षत्र स्‍वामी है। शनि इन कुंडली के 10 वें घर से गोचर कर रहा है जहां राहु विराजमान है। शनि का राहु के स्‍‍थान से गोचर बहुत बुरा परिणाम देता है लेकिन उच्‍च भावों में इसे या इन दोनों के होने को अच्‍छा माना जाता है। क्‍योंकि बुध शनि के नक्षत्र में है और शनि चंद्रमा के उपनक्षत्र स्‍वामी का नक्षत्र स्‍वामी है। शनि बुध के उपनक्षत्र स्‍वामी का नक्षत्र स्‍वामी भी है। इस तरह से शनि अखिलेश यादव की कुंडली में बहुत महत्‍वपूर्ण ग्रह है। राहू 10वें घर में विराजमान है और राहु के लिए इससे अच्‍छी स्थिति कोई दूसरी नहीं होती है। सूर्य, चंद्रमा और केतू राहु के नक्षत्र में हैं। राहू कुंडली में कई भावों का सिग्‍नीफिकेटर है अर्थात वह भाव राहू के प्रभाव में ही रहेंगे। अगर ये कहें कि राहू और शनि इस कुंडली में मुख्‍य भूमिका में हैं तो यह अतिश्‍योक्‍ति नही होगी। दसवें भाव में शनि का गोचर जहां पहले से राहू है उनके लिए योग कारक सिद्ध होगा। ये भी बहुत रोमांचक है कि उत्‍तर प्रदेश में चुनाव 11 फरवरी से 8 मार्च तक 2017 तक होंगे और इस बीच जातक की कुंडली में शनि का प्रत्‍यंतर चलेगा। इस दौरान बुध-चंद्रमा-शनि का समय होगा जो यह हर तरह से सफलता दिखाता है।

यह आंकलन उस जानकारी के आधार पर किया गया है जिसके सही या गलत होने के बारे में मैं स्‍वयं आश्‍वस्‍त नहीं हूं। इसलिए मैं इस बात का एक आंकलन प्रश्‍न कुंडली के अनुसार करूंगा-

इस आंकलन के समय यानी कि 17/01/2017, 12:28:17, नई दिल्‍ली के आधार पर जो कुंडली तैयार हुई वह इस प्रकार है:

इस कुंडली में लग्‍न स्‍वामी का उपनक्षत्र स्‍वामी जो कि शुक्र है 11वें घर में बैठा है। यह स्‍वयं गुरू के नक्षत्र में हैं जो कि 6ठें भाव में है। यहां पर एक बार फिर से शनि 5वें, 6ठें, 11वें और 12वें भाव का उपनक्षत्र स्‍वामी है और बुध के नक्षत्र में विराजमान है। इस कुंडली में सूर्य की दशा में शनि का अंतर 29-08-2017 तक रहेगा। सूर्य अपने ही नक्षत्र में है लेकिन यह शनि का उपनक्षत्र स्‍वामी होकर 8वें भाव में बैठा है। आठवें भाव का ऐसा ही संबंध इनकी जन्‍म कुंडली में भी देखने को मिला था। शनि अपने उपनक्षत्र में होकर बुध के नक्षत्र में है। कृष्‍ण मूर्ति जी के अनुसार वह उपनक्षत्र स्‍वामी ही होता है जो यह तय करता है कि मिलने वाला फल मी‍ठा होगा या कड़वा। इसलिए आठवां भाव और मजबूत हो जाता है क्‍योंकि दशा और अंतरा स्‍वामी के उपनक्षत्र स्‍वामी यहीं पर स्थित हैं। इस तरह सितारे अखिलेश की जीत की पूरी कहानी नहीं कहते। उत्‍तर प्रदेश में राजनीतिक हालात बहुत रोमांचक हो गए हैं और पूरे देश-दुनिया की नजर उत्‍तर प्रदेश की ओर हैं ऐसे में प्रश्‍न कुंडली तो अखिलेश को उत्‍तर प्रदेश की बागडोर पूर्ण बहुमत से एक बार फिर से देती नहीं दिख रही है।ऐसा मेरा अनुभव है की प्रश्न कुंडली सामान्यतः अधिक सटीक होती है , देखना  होगा की आने वाले समय में क्या तस्वीर उभर कर आती है । अखिलेश जी को मेरी शुभ कामनाएं ।