राक्षसकुल में जन्म लेने पर भी विभीषण ने दिया था भगवान राम का साथ, जानें क्या हैं राक्षस गण की खूबियां

ब्रह्मा जी से वरदान

ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्‍त करने की इच्‍छा से रावण, कुंभकर्ण और विभीषण ने घोर तपस्‍या की। तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर ब्रह्मा जी ने तीनों से वरदान मांगने को कहा। तब रावण ने मनुष्‍य के हाथों मृत्‍यु न होने, कुंभकर्ण ने निद्रा और विभीषण ने मांगा कि उसके मन में कभी कोई पाप का विचार न आए और उसका मन सदैव देव भक्‍ति में लीन रहे।

राक्षस कुल

इसी वरदान की वजह से राक्षस कुल में जन्‍मे विभीषण न हमेशा सत्‍य का साथ दिया और धर्मयुद्ध में श्रीराम के साथ खड़े रहे।

तो आइए अब जानते हैं राक्षस गण के बारे में कुछ बातें -:

क्‍या है राक्षस गण

राक्षस गण के नाम से ही आभास होता है कि जरूर इससे कोई नकारात्‍मक शक्‍ति जुड़ी होगी लेकिन यह अवधारणा बिलकुल गलत है। ज्‍योतिष शास्‍त्र में मनुष्‍य को तीन गणों में बांटा गया है जिसके अंतर्गत देव गण, मनुष्‍य गण और राक्षस गण आते हैं।

देवगण में जन्‍म लेने वाला व्‍यक्‍ति उदार, बुद्धिमान, साहसी, अल्‍पाहारी और दान-पुण्‍य करने वाला होता है। मनुष्‍य गण में जन्‍म लेने वाला व्‍यक्‍ति अभिमानी, समृद्ध और धनुर्विद्या में निपुण होता है। राक्षस गण के बारे में लोगों का मानना है कि यह नकारात्‍मक गुणों से परिपूर्ण होता है किंतु यह सत्‍य नहीं है।

राक्षस गण वाले जातक के गुण

इस गण वाले जातकों में विलक्षण प्रतिभा होती है। ऐसे व्‍यक्‍ति की छठी इंद्रिय काफी शक्‍तिशाली और सक्रिय होती है। यह जातक मुश्किल परिस्थिति में भी धैर्य और साहस से काम लेते हैं।

राक्षसकुल में जन्म लेने पर भी विभीषण ने दिया था भगवान राम का साथ, जानें क्या हैं राक्षस गण की खूबियां
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