गुरु गृह का तुला राशि में गोचर- जानिये इस गोचर के दौरान अपना राशिफल

शुभ फल देने वाला ग्रह गुरू जब अपने शत्रु शुक्र की राशि तुला में प्रवेश करेगा तो इसे एक बड़ी ज्‍योतिषीय घटना की तरह देखा जाना संभव है। देवताओं के गुरू बृहस्‍पति का दानवों के गुरू शुक्र की राशि में प्रवेश कई तरह से तुला राशि वालों और दूसरी अन्‍य राशि के जातकों को प्रभावित करेगा। वैसे शुक्र मीन राशि जो कि गुरू की राशि है में उच्च  का होता है लेकिन स्‍वयं मीन राशि मोक्ष की राशि मानी जाती है।

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वैसे गुरू का यह स्‍वाभाव रहा है कि यह जब भी द्वि स्‍वाभाव राशि में होता है तब कुछ खास फल नहीं दे पाता लेकिन अगर यह ग्रह स्थिर या चल राशि में हो तो अपनी उपस्थिति का अहसास जातक के साथ साथ पूरी दुनिया को भी करा ही देता है। कई जगह तो ऐसा देखा गया है कि गुरू द्विस्‍वाभाव राशि में बुरे प्रभाव देता है।

तुला राशि को संतुलन वाली राशि कहा जाता है लेकिन मैंने देखा और पाया है कि तुला लग्‍न के जातक पूरी तरह से असंतुलित रहते हैं और पूरी दृढ़ता से अपने निर्णय नहीं ले पाते हैं। इसका प्रमाण यह भी है कि यह राशि‍ स्‍वयं वायु स्‍वाभाव है कि और वायु में किसी प्रकार का संतुलन नहीं होता है।

गुरु का तुला में गोचर फल में मुझे ऐसा लगता है कि तुला राशि का चिन्‍ह वास्‍तव में तुला का संतुलन नहीं दिखा रहा है बल्कि संतुलन प्राप्‍त करने के लिए की जा रही कोशिश दिखा रहा है। तुला राशि का स्‍वामी शुक्र है इसलिए यह जीवन में एशो-आराम और सामाजिक एश्‍वर्य लेकर आता है। तुला राशि से संबंध व्‍यक्‍ति को अच्‍छा व्‍यापारी बनाता है और गुरू से इसका संबंध व्‍यक्ति‍ को धर्म और समाजसेवा की ओर ले जाता है। इस प्रकार यह संयोग व्‍यक्ति को धर्म, ज्ञान और समाजसेवा के क्षेत्र से धनार्जन करने की क्षमता देता है।

गुरू इस गोचर में मंगल, राहू और स्‍वयं के नक्षत्र से गोचर करेगा। राहू गुरू का मित्र नहीं है इसलिए यह तब हानि पहुंचाएंगा जब स्‍वाति नक्षत्र में होगा। आइए देखते हैं कि 12 राशियों पर इस गोचर का कैसा प्रभाव पड़ने वाला है:

1.  मेष:

सातवां घर शादी का, व्‍यापारिक संबंधों का, विदेश यात्राओं का, व्‍यापार का और कानूनी समझौतों का होता है। गुरू का सातवें घर में उपस्थित होना मानसिक रूप से शांति देने का काम करेगा। सामान्‍य रूप से मेष के जातक थोडा गर्म मिजाज के होते हैं अगर उनका जन्‍म शुक्र ग्रह के नक्षत्र में न हुआ हो तो। इस गोचर के दौरान गुरू मंगल, राहू और स्‍वयं अपने नक्षत्रों से होकर गुजरेगा। शादीशुदा जीवन में संघर्ष होगा लेकिन धीरे-धीरे इससे बाहर आ जाएंगे। संभव है कि गुरू के इस गोचर के दौरान मेष राशि के जातको का वजन तेजी से बढ़े इसलिए बेहतर होगा कि अपनी खाने की आदतों पर ध्‍यान दें। इस गोचर के दौरान मिलने वाली मानसिक शांति ही आपकी सारी समस्‍याओं का समाधान जैसी है। जीवनसाथी हो या बिजनेस पार्टनर दोनों न तो सहयोग के मूड में रहेंगे और न ही आपके साथ आगे बढ़ने की इच्‍छा होगी। जब गुरू राहू के नक्षत्र में पहुचेगा तो स्‍वस्‍थ्‍य में थोड़ी परेशानी आएगी। गुप्‍त रोग भी हो सकते हैं। जब गुरू अपने नक्षत्र में आएगा तो खर्चों में बहुत बढ़ोत्‍तरी हो जाएगी। बेवजह की चीजों में धन व्‍यय करेंगे। दूर के लोगों से व्‍यापारिक रिश्‍ते बनेंगे। मेष राशि के कुछ जातकों का विवाह भी संभव है।