कुण्डली में चंद्रमा बिगड़ा तो बिगड़ सकते हैं आपके कई काम

वैदिक ज्‍योतिष में चंद्रमा को अत्‍यंत महत्‍वूपर्ण ग्रह माना गया है। आधुनिक विज्ञान में भी चंद्रमा को प्रभावशाली ग्रह बताया गया है। कई वैज्ञानिकों के शोध में भी ये बात साबित हो चुकी है कि मनुष्‍य के व्‍यवहार, मन और मस्तिष्‍क पर चंद्रमा का ग्रहरा प्रभाव पड़ता है। तो आइये जानते हैं कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति |

ज्योतिष में चंद्रमा को बुद्धि, धन, दीर्घायु का कारक माना गया है। जन्‍म के समय कुंडली में चंद्रमा की स्थिति के आधार पर जातक के जीवन और उसके भविष्‍य के बारे में पता लगाया जा सकता है।

27 नक्षत्रों को 4 भागों में बांटा गया है। इन 4 भागों में विभाजित नक्षत्रों पर चंद्रमा के प्रभाव के आधार पर ही जातक के बारे में बताया जा सकता है।

कुण्डली में चंद्रमा का प्रभाव

पूर्णिमा और अमावस्‍या के बारे में तो हम सभी जानते हैं। पूर्णिमा पर समुद्र का स्‍तर बढ़ जाता है तो वहीं अमावस्‍या के दिन इसके स्‍तर में कमी आती है। पृथ्‍वी का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है और बाकी स्‍थान पर मनुष्‍य और अन्‍य जीव-जंतु वास करते हैं। इसलिए यह स्‍पष्‍ट है कि कुण्डली में चंद्रमा के होने का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है।

अमावस्‍या के दिन काला जादू,  जादू-टोना और रहस्‍यमयी कार्यों को अंजाम दिया जाता है। इस दिन को बुरे कामों के लिए शुभ समझा जाता है।

कब अशुभ होता है चंद्रमा

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार छठे, आठवें और बारहवें भाव में चंद्रमा की उपस्थिति को अशुभ माना जाता है और इस कारण जातक की आयु में कमी आती है। इन भावों में चंद्रमा के गोचर करने पर जातक को मानसिक तनाव, बेचैनी, निर्णय लेने की क्षमता में कमह आती है।

मानसिक के साथ-साथ चंद्रमा का शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर भी प्रभाव पड़ता है। यदि कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर हो तो आंखों में कमज़ोरी, पाचन तंत्र में खराबी, प्रजनन तंत्र में समस्‍या, बुद्धि में कमी और बुखार रहता है। कुंडली में चंद्रमा के कमज़ोर होने पर जातक को इस तरह की सामान्‍य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

चंद्रमा के शुभ और कमज़ोर होने का महत्‍व

यदि कुंडली में चंद्रमा मजबूत या शुभ हो तो जातक मानसिक रूप से मजबूत और आत्‍मविश्‍वासी बनता है। ऐसे व्‍यक्‍ति अपने जीवन में आने वाली सभी समस्‍याओं का डटकर सामना करता है। वहीं अगर कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर हो तो जातक का काम में मन नहीं लगता, वो काम से जी चुराने के बहाने बनाता है और अपनी गलतियों का दोष दूसरों के सिर पर मढ़ देता है।

धन भी चंद्रमा से संबंधित है। अगर कुंडली में कोई और शुभ ग्रह या शुभ योग नहीं बन रहा लेकिन चंद्रमा कुंडली में शुभ भाव में बैठा है या मजबूत है तो जातक को अपने जीवन में कभी भी गरीबी का मुंह नहीं देखना पड़ता है।

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चंद्रमा के अशुभ प्रभाव

वहीं इसके विपरीत अगर चंद्रमा अशुभ, पीडित या कमज़ोर हो या कुंडली में केमद्रुम योग बन रहा हो तो जातक को अपना जीवन हमेशा गरीबी में गुज़ारना पड़ता है। ऐसे व्‍यक्‍ति का जन्‍म तो अमीर परिवार में होता है लेकिन उसकी मृत्‍यु गरीबी में होती है। इनकी सेहत भी खराब रहती है।

जब चंद्रमा किसी शुभ ग्रह के साथ कुंडली में बैठा हो तो यह जातक को शुभ फल देता है। जैसे कि गुरु के साथ चंद्रमा की युति होने पर गजकेसरी योग का निर्माण होता है एवं इस योग के कारण व्‍यक्‍ति धनवान और समृद्ध बनता है।

ऐसा ही मंगल के साथ भी है। चंद्रमा-मंगल के साथ मिलकर लक्ष्‍मी योग का निर्माण करता है जो जातक को समृद्ध और खुशहाल बनाता है।

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चंद्रमा के कारण आती हैं ये मुसीबतें

– ज्‍वर

– बुरे सपने आना

– मानसिक परेशानी

– भूत-प्रेत का चक्‍कर

– आसपास के वातावरण के बारे में नकारात्‍मक विचार आना

– दरिद्रता

इसके अलावा कुंडली में चंद्रमा किस राशि या नक्षत्र में है, इस बात से भी उसके प्रभाव के बारे में पता लगाया जा सकता है।

चंद्रमा न केवल एक ग्रह है बल्कि इसका जीवन के कई पहलुओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आप क्‍या सोचते हैं, क्‍या करते हैं, ये सब काफी हद तक चंद्रमा पर निर्भर करता है।

चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय

अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर है तो आप वैदिक उपायों और चंद्रमा के रत्‍न एवं ताबीज़ को धारण कर इसे मजबूत कर इसके शुभ फल प्राप्‍त कर सकते हैं। चंद्रमा का रत्‍न एवं यंत्र प्राप्‍त करने के लिए यहां क्‍लिक करें।